The doors of Gangotri, Yamunotri and Kedarnath are closed
Char Dham Yatra 2025: उत्तराखंड, जिसे देवभूमि कहा जाता है, अपने चार पवित्र धामों—यमुनोत्री, गंगोत्री, केदारनाथ और बद्रीनाथ के लिए विश्व प्रसिद्ध है। हर वर्ष जब हिमालय में शीत ऋतु का आगमन होता है तब इन धामों के कपाट विधिवत पूजा-अर्चना के साथ बंद किए जाते हैं। इस वर्ष भी श्रद्धा और आस्था से ओत-प्रोत वातावरण में गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट बंद हुए, जबकि बद्रीनाथ धाम के कपाट परंपरा अनुसार 25 नवंबर, 2025 को दोपहर 2:56 बजे बंद होंगे।
कपाट बंद होने के बाद चारधामों की शीतकालीन यात्रा चलती रहेगी। आपको बताते हैं कि शीतकाल या सर्दी के मौसम में कहां-कहां होती है गंगोत्री, यमुनोत्री, केदारनाथ औैर बद्रीनाथ की पूजा-अर्चना।
🕉️ गंगोत्री धाम — माँ गंगा की शीतकालीन यात्रा
भागीरथी नदी के उद्गम स्थल पर स्थित गंगोत्री धाम के कपाट भैया दूज के पावन अवसर पर बंद किए गए। माँ गंगा की प्रतिमा को पूरे विधि-विधान के साथ मुखबा गाँव में लाया गया, जहाँ शीतकाल के दौरान उनकी पूजा की जाएगी। सर्दी के मौसम में श्रद्धालु मुखबा पहुंचकर मां गंगा की आराधना कर सकते हैं। आपको बता दें गंगोत्री धाम में मां गंगा की पूजा होती है। शीतकाल में 6 महीने के लिए मंदिर के कपाट बंद रहते हैं।

🕉️यमुनोत्री धाम- मां यमुना की शीतकालीन यात्रा
भैया दूज पर यमुनोत्री धाम के कपाट बंद करने की परंपरा निभाई गई। देवी यमुना की प्रतिमा को भक्तों और पुजारियों के जयकारों के बीच खरसाली गाँव लाया गया। यह वही स्थान है जहाँ देवी यमुना की पूजा शीतकाल में की जाती है। अगर आप शीतकाल में मां यमुना की पूजा अर्चना करना चाहते हैं तो खरसाली आ सकते हैं। आपको बता दें यमुनोत्री धाम में मां यमुना की पूजा होती है। शीतकाल में 6 महीने के लिए मंदिर के कपाट बंद रहते हैं।

🔔 केदारनाथ धाम — कहां है भगवान शिव का शीतकालीन प्रवास
केदारनाथ धाम के कपाट भी भैया के दिन पारंपरिक रीति-रिवाजों के साथ बंद किए गए।
कपाट बंद होने से पूर्व मंदिर परिसर में महाआरती और रुद्राभिषेक हुआ। इसके बाद भगवान केदारनाथ की चल विग्रह डोली को उखीमठ स्थित ओंकारेश्वर मंदिर ले जाया गया, जहाँ वे शीतकाल के दौरान पूजे जाते हैं। शीतकाल के दौरान उखीमठ में ही भगवान शिव की पूजा होगी। आपको बता दें केदारनाथ धाम में भगवान शंकर की पूजा होती है। शीतकाल में 6 महीने के लिए मंदिर के कपाट बंद रहते हैं।

अब सबसे आखिरी में बद्रीनाथ धाम के कपाट बंद होंगे। बदरीनाथ धाम के कपाट 25 नवंबर, 2025 को दोपहर 2:56 बजे शीतकाल के लिए बंद हो जाएंगे। बदरीनाथ धाम की यात्रा भी अब आखिरी चरण में पहुंच चुकी है। लिहाजा बड़ी संख्या में श्रद्धालु बदरीनाथ धाम पहुंच रहे हैं। आपको बता दें बद्रीनाथ धाम में भगवान विष्णु की पूजा होती है। शीतकाल में 6 महीने के लिए मंदिर के कपाट बंद रहते हैं। मान्यता है कि इस दौरान देवता भगवान विष्णु की आराधना करते हैं।

चारधामों का धार्मिक महत्व
कपाट बंद होने के साथ ही उत्तराखंड में शीतकालीन यात्रा (Winter Char Dham) की शुरुआत हो जाती है। कहा जाता है कि कपाट बंद होने के बाद भी इन पवित्र स्थलों की ऊर्जा बनी रहती है।
भक्त मानते हैं कि देवी-देवता शीतकाल में ध्यान की अवस्था में चले जाते हैं ताकि आने वाले वर्ष में भक्तों को पुनः आशीर्वाद दे सकें।
गंगोत्री, यमुनोत्री और केदारनाथ धाम के कपाट बंद होना सिर्फ एक धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि आस्था, अनुशासन और प्रकृति के संतुलन का प्रतीक है। यह हमें याद दिलाता है कि जैसे प्रकृति विश्राम लेती है, वैसे ही अध्यात्म भी एक नई शुरुआत के लिए विराम लेता है।
