देहरादून: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू उत्तराखंड दौरे पर हैं। राष्ट्रपति के संबोधन से उत्तराखंड विधानसभा के विशेष सत्र का शुभारंभ हुआ। उत्तराखंड विधानसभा के इतिहास में यह दूसरा मौका है जबकि सदन में राष्ट्रपति ने अपना संबोधन दिया।
राज्य स्थापना के 25 वर्ष पूरे होने पर रजत जयंती के उपलक्ष्य पर विधानसभा का दो दिवसीय विशेष सत्र आयोजित किया गया है। तीन दिवसीय दौरे पर उत्तराखंड पहुंची राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने विधानसभा के विशेष सत्र को संबोधित किया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उत्तराखण्ड में नारी सशक्तिकरण के प्रयासों की सराहना की
उत्तराखण्ड विधानसभा के विशेष सत्र में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने उत्तराखण्ड में नारी सशक्तिकरण के प्रयासों की खुले मन से सराहना की तो माहौल और भी गर्मजोशी से भर गया। राष्ट्रपति ने अपने अभिभाषण में राज्य में महिला शिक्षा के विस्तार पर चर्चा की। मातृ-शिशु मृत्यु दर में कमी की बात को प्रमुखता से उभारा। पुरानी पीढ़ी की स्वर्गीय गौरा देवी से लेकर नई पीढ़ी की वंदना कटारिया का नाम लिया। उत्तराखण्ड आंदोलन में प्रमुख महिला चेहरा स्वर्गीय सुशीला बलूनी के साथ ही बछेंद्री पाल, राधा भट्ट जैसे प्रमुख नामों का उल्लेख किया। पहली महिला स्पीकर ऋतु खंडूड़ी भूषण की नियुक्ति पर भी राष्ट्रपति ने सराहना की। राष्ट्रपति ने कहा कि उत्तराखण्ड विधानसभा ने अपना गौरव बढ़ाया है। राष्ट्रपति ने विधानसभा में महिला सदस्यों की संख्या में वृद्धि की अपेक्षा भी जाहिर की।

राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में किया समान नागरिक संहिता का जिक्र
राष्ट्रपति ने अपने संबोधन में समान नागरिक संहिता (यूसीसी) का खास तौर पर जिक्र किया। उन्होंने समानता की मजबूत पैरवी करने वाले संविधान के अनुच्छेद-44 का उल्लेख करते हुए यूसीसी लागू किए जाने की चर्चा की। यूसीसी कानून में योगदान करने पर उन्होंने सदस्यों की सराहना भी की।
इस मौके पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने अपने संबोधन की शुरूआत बेटियों के विश्व विजेता बनने की बात से की। उन्होंने जैसे ही बेटियों को बधाई दी, तो पूरे सदन के साथ ही राष्ट्रपति ने भी तालियां बजाईं
इस मौके पर सीएम धामी ने कहा कि लंबे कठिन संघर्ष और परिश्रम के परिणामस्वरुप हमें उत्तराखंड राज्य प्राप्त हुआ। राज्य निर्माण के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर करने वाले शहीद आंदोलनकारियों को कोटि-कोटि नमन।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने जीवन की चुनौतियों का डटकर सामना करते हुए राष्ट्र सेवा के क्षेत्र में अद्वितीय योगदान दिया है। जनजातीय गौरव की सशक्त प्रतीक के रूप में वे समाज के लिए प्रेरणास्रोत हैं।
इस मौके पर राज्यपाल ले.ज. गुरमीत सिंह (रि) ने कहा कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने सदन को एक प्रेरक और भावपूर्ण अभिभाषण से सुशोभित किया, जिससे पूरा सदन गौरव और भावना से भर गया। देवभूमि उत्तराखंड के प्रति उनका स्नेह, करुणा और आशीर्वाद प्रेरणा का एक गहन स्रोत है, जो समर्पण, राष्ट्रीय भावना और लोक कल्याण के प्रति प्रतिबद्धता के साथ सेवा करने के हमारे संकल्प को और मजबूत करता है।
