बागेश्वर: मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बागेश्वर दौरे के दूसरे दिन रविवार को कपकोट के केदारेश्वर मैदान में आयोजित विशाल जन सम्मेलन में प्रतिभाग किया। इस दौरान मुख्यमंत्री ने कुल ₹108 करोड़ की 42 विकास योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास कर क्षेत्र के लिए नई सौगातों की घोषणा की। इनमें ₹62 करोड़ की 24 योजनाओं का लोकार्पण तथा ₹45.95 करोड़ की 18 योजनाओं का शिलान्यास शामिल है।
जनता की भागीदारी ने विकास कार्यों पर जताया विश्वास
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि कार्यक्रम में जनता की भारी उपस्थिति यह प्रमाण है कि राज्य सरकार विकास के मार्ग पर सही दिशा में कार्य कर रही है। उन्होंने बताया कि गरीब वर्ग, महिलाओं और युवाओं के लिए कई कल्याणकारी योजनाएँ प्रभावी ढंग से संचालित की जा रही हैं।
‘मानस खंड माला’ परियोजना से धार्मिक स्थलों का कायाकल्प
सीएम धामी ने ‘मानस खंड माला’ परियोजना की प्रगति की जानकारी साझा करते हुए कहा कि इस योजना के तहत धार्मिक स्थलों का जीर्णोद्धार और सौंदर्यीकरण तेजी से किया जा रहा है, जिससे धार्मिक पर्यटन को नया आयाम मिलेगा।

शीतकालीन पर्यटन से बढ़ेगा रोजगार
मुख्यमंत्री ने कहा कि शीतकालीन पर्यटन की नई पहल से प्रदेश में सालभर पर्यटन गतिविधियां बढ़ेंगी, जिससे स्थानीय युवाओं के लिए बड़े पैमाने पर रोजगार के अवसर तैयार होंगे।
One District–Two Product: ताम्र शिल्प को नई पहचान
सीएम धामी ने बताया कि One District–Two Product योजना के तहत बागेश्वर की पारंपरिक ताम्र शिल्प को राष्ट्रीय पहचान मिल रही है। उन्होंने कहा कि सरयू एवं गोमती नदी संरक्षण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहे हैं, वहीं बागेश्वर रेल लाइन का सर्वेक्षण भी पूरा हो चुका है, जो भविष्य में क्षेत्र के विकास के लिए महत्वपूर्ण कदम होगा।
स्वास्थ्य सेवाओं को मिलेगा विस्तार
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि गरुड़ अस्पताल का उच्चीकरण किया जाएगा, जिससे स्थानीय जनता को उन्नत एवं गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें। इसके साथ ही उन्होंने विभिन्न स्वायत सहकारिता एवं स्वयं सहायता समूहों को वित्तीय सहायता के चेक भी वितरित किए।
विभागीय स्टॉलों का निरीक्षण, स्थानीय कारीगरों का उत्साहवर्धन
कार्यक्रम के दौरान मुख्यमंत्री ने कृषि, उद्यान, रेशम, सहकारिता, ग्राम्य विकास, महिला सशक्तिकरण, डेयरी, पशुपालन एवं उद्योग विभाग सहित विभिन्न विभागों द्वारा लगाए गए स्टॉलों का निरीक्षण किया। उन्होंने स्थानीय हस्तशिल्पकारों से संवाद कर उनका उत्साह बढ़ाया और उनके कार्यों की सराहना की।
