करीब आधी सदी बाद इंसान एक बार फिर चांद की तरफ कदम बढ़ाने जा रहा है। 1 अप्रैल को NASA का Artemis II मिशन लॉन्च होने जा रहा है। Apollo मिशनों के बाद यह पहला मौका होगा जब इंसान पृथ्वी की सीमाओं से बाहर निकलकर चंद्रमा तक जाएगा। फर्क बस इतना है कि इस बार लक्ष्य सिर्फ चांद तक पहुंचना ही नहीं है बल्कि भविष्य की चांद के मिशनों का रूपरेखा भी तैयारी करना है। आर्टेमिस-2 मिशन 50 साल से ज्यादा समय बाद चांद के पास जाने वाला पहला मानव मिशन होगा।

चांद का दीदार करेंगे 4 अंतरिक्ष यात्री
आर्टेमिस-2 मिशन का हिस्सा चार अंतरिक्ष यात्री हैं, जिनमें से तीन अमेरिकी रीड वाइसमैन, विक्टर ग्लोवर और क्रिस्टीना कोच और चौथे अंतरिक्ष यात्री कनाडा के जेरेमी हैनसेन हैं। ये चारों यात्री चांद का चक्कर लगाकर वापस धरती पर लौटेंगे। आर्टेमिस-2 मिशन के जरिए चारों अंतरिक्ष यात्री सिर्फ चांद की कक्षा में चक्कर लगाकर वापस धरती की तरफ चल पड़ेंगे। इनमें से कोई भी अंतरिक्ष यात्री चांद पर नहीं उतरेगा।
नासा के अनुसार लॉन्च के बाद अंतरिक्ष यान पहले पृथ्वी की कक्षा में घूमेगा। इसके बाद यह चांद की ओर जाएगा और चांद के पास से उड़ान भरते हुए उसके चारों ओर चक्कर लगाएगा। फिर यह वापस पृथ्वी पर लौटेगा और समुद्र में उतरकर मिशन पूरा करेगा।

क्या है आर्टेमिस-2 मिशन का मकसद
आर्टेमिस-2 मिशन चांद पर एक बार फिर से इंसानों को उतारने की फाइनल रिहर्सल है। इसके बाद आर्टेमिस कार्यक्रम का अगला मिशन आर्टेमिस-III (Artemis II ) है। जिसमें इंसानों को चांद पर उतरने की योजना है। नासा की योजना के अनुसार कार्यक्रम के चौथे चरण में 2028 की शुरुआत तक चांद पर मानव लैंडिंग का लक्ष्य रखा गया है। यह योजना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनल्ड ट्रंप की उस योजना का हिस्सा है, जिसमें उन्होंने अमेरिकियों को फिर से चांद पर भेजने का लक्ष्य रखा था
कितने दिनों का है आर्टेमिस-2 मिशन
10 दिनों का यह मिशन यह जांचने के लिए है कि क्या मौजूदा तकनीक इंसानों को धरती से चांद के करीब तक पहुंचाने में कारगर साबित हैं। क्योंकि अभी तक तो मौजूदा तकनीक के जरिए सिर्फ इंसानों को स्पेस स्टेशन तक ले जाने और वहां तक धरती पर वापस लाने का काम हो रहा है। करीब 50 साल बाद ये पहला मौका होगा जब इंसान धरती की कक्षा से बाहर जाएंगे और वो भी चांद के इतने करीब तक।
इस मिशन में एस्ट्रोनॉट चंद्रमा के पीछे (Far Side) से गुजरते हुए पृथ्वी से करीब 6,85,000 मील की दूरी तय करेंगे। यह अब तक किसी भी इंसान द्वारा तय की गई सबसे लंबी दूरी होगी। आर्टेमिस-2 की सफलता ही तय करेगी कि आर्टेमिस-3 मिशन में इंसान चांद की सतह पर कदम रख पाएगा या नहीं।

इंसान अब तक कितनी बार चांद पर पहुंचा
इंसान अब तक 6 बार चांद की सतह पर उतर चुका है। ये भी मिशन अमेरिका की स्पेस एजेंसी NASA के Apollo Program के तहत हुए थे। सबसे पहली बार 1969 में Apollo 11 मिशन के जरिए इंसान ने चांद पर कदम रखा। नील आर्मस्ट्रॉन्ग दुनिया के पहले इंसान बने जिन्होंने चांद की जमीन को छुआ। उनके साथ बज़ एल्ड्रिन भी थे, जबकि माइकल कॉलिन्स चांद की कक्षा में ही रहे।
इसके बाद NASA ने एक के बाद एक कई मिशन भेजे। Apollo 12, Apollo 14, Apollo 15, Apollo 16 और आखिरी Apollo 17। इन सभी मिशनों में अंतरिक्ष यात्री चांद पर उतरे, वहां रिसर्च किया, पत्थर और सैंपल लेकर आए और फिर सुरक्षित पृथ्वी पर लौटे। इस तरह देखा जाए तो अब तक चांद पर 12 अंतरिक्ष यात्रा जा चुके हैं।
इंसान 1969 में चांद पर पहुंच सकता था तो फिर उसके बाद क्यों नहीं गया?।
दरअसल उस समय अमेरिका और सोवियत यूनियन के बीच स्पेस रेस चल रही थी, जिसमें चांद पर पहुंचना एक बड़ी जीत थी। लेकिन जैसे ही ये लक्ष्य हासिल हो गया, वैसे ही मिशनों की जरूरत कम होती गई। इसके अलावा चांद पर जाना बेहद महंगा था, और सरकारों ने अपना ध्यान दूसरे प्रोजेक्ट्स पर लगा दिया जैसे स्पेस स्टेशन और सैटेलाइट्स। इस वजह से 1972 के बाद आज तक कोई इंसान चांद पर नहीं गया।
मगर आज के समय में इंसान की जरुरतें बदल रही हैं। अब सिर्फ स्पेस में पहुंचना कोई उपलब्धी नहीं है बल्कि भविष्य की जरुरतों को देखते हुए अभी से तैयारियां भी करना है। इन मिशनों का मकसद चांद पर टिकना, वहां बेस बनाना और आगे मंगल ग्रह तक पहुंचने का रास्ता तैयार करना है। तो सीधी बात ये है इंसान अब तक 6 बार चांद पर जा चुका है, लेकिन असली रोमांच अभी बाकी है… क्योंकि
