मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने मुख्यमंत्री कैंप कार्यालय स्थित मुख्य सेवक सदन में प्रदेश के विभिन्न क्षेत्रों से आए लोगों की समस्याएं सुनीं। जनसुनवाई के दौरान लोगों ने सड़क, पेयजल, विद्युत, स्वास्थ्य, शिक्षा, राजस्व, पेंशन, रोजगार, आर्थिक सहायता सहित विभिन्न क्षेत्रीय एवं व्यक्तिगत समस्याओं से जुड़े प्रकरण मुख्यमंत्री के समक्ष रखे।
मुख्यमंत्री ने सभी समस्याओं को गंभीरता से सुनते हुए संबंधित अधिकारियों को उनके त्वरित, प्रभावी और समयबद्ध समाधान के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि जिन समस्याओं का समाधान जिला अथवा विभागीय स्तर पर किया जा सकता है, उन्हें अनावश्यक रूप से शासन स्तर पर लंबित नहीं रखा जाना चाहिए।
उन्होंने अधिकारियों को निर्देश दिए कि अपने स्तर पर जनसमस्याओं का प्राथमिकता के आधार पर निस्तारण सुनिश्चित करें। मुख्यमंत्री ने कहा कि जनसमस्याओं का समाधान राज्य सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल है और शासन-प्रशासन के प्रत्येक स्तर पर अधिकारियों की जिम्मेदारी है कि आमजन की समस्याओं को संवेदनशीलता के साथ सुना जाए।
मुख्यमंत्री ने कहा कि लोगों को अपने कार्यों के लिए बार-बार सरकारी कार्यालयों के चक्कर न लगाने पड़ें, इसके लिए सरकारी कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जन शिकायतों के समाधान के लिए सीएम हेल्पलाइन-1905, जनसुनवाई और ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ जैसे कार्यक्रमों को प्रभावी बनाया जा रहा है। ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ के माध्यम से प्रशासन जनता के बीच पहुंचकर समस्याओं के समाधान के साथ पात्र लोगों को विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं और सेवाओं से जोड़ रहा है।
मुख्यमंत्री ने बताया कि 17 सितम्बर से शुरू हुआ सेवा संकल्प अभियान 17 अक्टूबर 2026 तक आयोजित किया जा रहा है। अभियान के तहत सेवा, जनभागीदारी, संवाद और नवाचार से जुड़े विभिन्न कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं।
‘सेवा सेतु अभियान’ के अंतर्गत ‘जन-जन की सरकार, जन-जन के द्वार’ शिविरों के साथ स्वास्थ्य एवं बहुउद्देशीय शिविर भी आयोजित किए जाएंगे। इनके माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं एवं सेवाओं को आमजन तक पहुंचाया जाएगा। मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि जनसुनवाई में प्राप्त प्रत्येक प्रकरण पर गंभीरता से कार्रवाई की जाए। शिकायतों के निस्तारण की नियमित मॉनिटरिंग हो और यह सुनिश्चित किया जाए कि समाधान केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि संबंधित व्यक्ति को वास्तविक राहत मिले।
