कालाढुंगी (नैनीताल): मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने तहसील कालाढुंगी के धनपुर धमोला स्थित नमस्ते कॉर्बेट रिज़ॉर्ट में आयोजित ललित फाउंडेशन के पंचम अधिवेशन “अभिव्यंजना 5.0” का दीप प्रज्ज्वलित कर शुभारंभ किया। देश के प्रतिष्ठित कवियों, साहित्यकारों और साहित्य प्रेमियों की उपस्थिति में आयोजित इस कार्यक्रम को मुख्यमंत्री ने विचारों, भावनाओं और सृजनशीलता का उत्सव बताया।
अपने संबोधन में मुख्यमंत्री ने कहा कि “अभिव्यंजना” केवल एक कवि सम्मेलन नहीं, बल्कि समाज को नई सोच और नई दिशा देने वाला मंच है। कवि केवल शब्दों का सृजन नहीं करता, बल्कि वह समाज का चिंतक, मार्गदर्शक और प्रेरक भी होता है। उसकी रचनाएं समाज को आईना दिखाने के साथ-साथ सकारात्मक बदलाव की राह भी प्रशस्त करती हैं।
मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत के स्वतंत्रता आंदोलन में भी कवियों और साहित्यकारों की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। उनकी लेखनी ने लोगों में देशभक्ति की भावना जगाई और स्वतंत्रता संग्राम को जनआंदोलन बनाने में योगदान दिया। आज भी कविता और साहित्य समाज में जागरूकता और परिवर्तन का प्रभावी माध्यम बने हुए हैं।
उन्होंने प्रसिद्ध कवि डॉ. कुमार विश्वास की सराहना करते हुए कहा कि उन्होंने अपनी अनूठी शैली और प्रभावशाली प्रस्तुति के माध्यम से कविता को नई पहचान दिलाई है। वहीं पद्मश्री अशोक चक्रधर की रचनाएं हास्य, व्यंग्य और सामाजिक सरोकारों का सुंदर संगम प्रस्तुत करती हैं। मुख्यमंत्री ने डॉ. हरिओम पंवार की ओजस्वी कविताओं को राष्ट्रभक्ति और जनजागरण का सशक्त माध्यम बताया।
मुख्यमंत्री धामी ने कहा कि इन सभी साहित्यकारों ने कविता को मंचों की सीमाओं से निकालकर आम जनमानस तक पहुंचाने का सराहनीय कार्य किया है। साथ ही युवाओं को साहित्य और भारतीय संस्कृति से जोड़ने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
उन्होंने कहा कि उत्तराखंड सदियों से साहित्य, संस्कृति और सृजन की भूमि रहा है। हिमालय की गोद में बसे इस राज्य ने अनेक महान साहित्यकार, कवि और लोक चिंतक दिए हैं। सुमित्रानंदन पंत, चंद्रकुंवर बर्त्वाल, गिर्दा, शैलेश मटियानी, गौरा पंत ‘शिवानी’ और मोहन उप्रेती जैसे साहित्यकारों ने अपनी लेखनी और सृजन के माध्यम से समाज को नई दिशा देने का कार्य किया है।
मुख्यमंत्री ने कहा कि उत्तराखंड की साहित्यिक परंपरा आज भी नई पीढ़ी को अपनी जड़ों, संस्कृति और राष्ट्र निर्माण के मूल्यों से जोड़ने का कार्य कर रही है। उन्होंने कहा कि साहित्य समाज की आत्मा है और इसे आगे बढ़ाने के लिए ऐसे आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने समाज और साहित्य के क्षेत्र में उल्लेखनीय योगदान देने वाले कवियों, कवित्रियों और साहित्यकारों को सम्मानित भी किया। उन्होंने कहा कि जब ये कवि मंच पर अपनी रचनाएं प्रस्तुत करते हैं, तो उनकी कविताएं केवल शब्द नहीं रहतीं, बल्कि प्रेरणा, चेतना और परिवर्तन की आवाज बन जाती हैं।
मुख्यमंत्री ने सभी साहित्यकारों और युवा रचनाकारों का आह्वान किया कि वे अपनी लेखनी के माध्यम से समाज में सकारात्मक सोच, राष्ट्रीय चेतना और सांस्कृतिक मूल्यों को म
