
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से मुख्यमंत्री आवास में उत्तराखण्ड महापरिषद, लखनऊ के प्रतिनिधि भरत सिंह बिष्ट ने भेंट की। इस दौरान उन्होंने मुख्यमंत्री को उत्तराखण्ड महापरिषद से संबंधित एक कार्यक्रम में शामिल होने के लिए आमंत्रित किया। मुलाकात के दौरान उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति, पारंपरिक रीति-रिवाजों, भाषा और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण एवं संवर्धन से जुड़े विभिन्न विषयों पर चर्चा हुई। बातचीत में उत्तराखण्ड से बाहर रह रहे प्रवासी उत्तराखण्डियों को अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जोड़े रखने और प्रदेश की परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठनों की भूमिका पर भी विचार-विमर्श किया गया।
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखण्ड की लोक संस्कृति, परंपराएं और आध्यात्मिक विरासत राज्य की विशिष्ट पहचान हैं। इनका संरक्षण और संवर्धन सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है। उन्होंने कहा कि प्रदेश की सांस्कृतिक धरोहर को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए राज्य सरकार निरंतर प्रयास कर रही है।
मुख्यमंत्री ने प्रवासी उत्तराखण्डियों द्वारा अपनी मातृभूमि की संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक सरोकारों से जुड़े रहने के प्रयासों के महत्व पर भी बल दिया। उन्होंने कहा कि सामाजिक एवं सांस्कृतिक संगठन अपनी गतिविधियों के माध्यम से लोक परंपराओं, भाषा और सांस्कृतिक विरासत को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
उत्तराखण्ड से बाहर रहने वाले लोगों को अपनी जड़ों से जोड़े रखना और नई पीढ़ी को प्रदेश की समृद्ध परंपराओं से परिचित कराना सांस्कृतिक निरंतरता के लिए आवश्यक है। उत्तराखण्ड महापरिषद, लखनऊ जैसे संगठनों के प्रयास प्रवासी समुदाय के बीच सांस्कृतिक जुड़ाव बनाए रखने में सहायक हो सकते हैं। मुख्यमंत्री और प्रतिनिधि के बीच हुई इस भेंट में उत्तराखण्ड की सांस्कृतिक पहचान को संरक्षित रखने और उसका व्यापक प्रचार-प्रसार करने से जुड़े विषय प्रमुख रहे।
