आज रात चंद्रग्रहण लगने जा रहा है। यह पूर्ण ग्रहण यानी ब्लड मून होगा और इसे पूरे देश में कहीं से भी देखा जा सकेगा। साल 2022 के बाद भारत में दिखने वाला यह सबसे लंबा पूर्ण चंद्र ग्रहण होगा।
साल का आखिरी चंद्रग्रहण आपकी जिंदगी पर क्या प्रभाव डालेगा ये जानने के लिए हमने बात की उत्तराखंड के प्रसिद्ध ज्योतिर्विद नितेश बौडाई से।
भारत में खग्रास रूप में दिखाई देगा चंद्रग्रहण

नितेश बौडाई की गणना के मुताबिक ये ग्रहण हम इंसानों के जीवन में ढेर सारे प्रभाव डाल सकता है। उनका कहना है कि ये चंद्रग्रहण संपूर्ण भारत में खग्रास के रूप में दिखाई देगा। खग्रास चंद्रग्रहण का अर्थ है पूर्ण चंद्रग्रहण। “खग्रास” शब्द का प्रयोग विशेष रूप से भारतीय ज्योतिष और खगोल विज्ञान में किया जाता है। ग्रहण रात्रि 9:57 पर शुरू होगा, ग्रहण का मध्य 11:42 पर और ग्रहण की समाप्ति रात्रि 1:27 पर होगी। ग्रहण की कुल अवधि साढ़े तीन घंटे की होगी।
यह ग्रहण भारत और सम्पूर्ण एशिया में प्रारंभ से समाप्ति तक दिखाई देगा। भारतीय पंचांग के अनुसार यह ग्रहण भाद्रपद मास की शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि, कुम्भ राशि, शतभिषा नक्षत्र पर घटित होगा।

कैसे रहेगा चंद्रग्रहण का प्रभाव
आचार्य वाराहमिहिर के अनुसार यदि ग्रहण भाद्रपद मास में हो तो पर्वतीय प्रदेशों में रहने वाले लोग, विशेष व्यक्तियों के परिवार जन, बोझा उठाने वाले मजदूरों, महिलाओं को पीड़ा और उनके गर्भ का नाश और पति-पत्नियों में परस्पर प्रेम की कमी होती है।
सोना, चांदी, तिल, तेल, मूंगफली, घी और क्रूड ऑयल महंगे हो सकते हैं। पाकिस्तान के सिंध प्रांत और अफगानिस्तान के दक्षिण प्रांतों के क्षेत्रों में तनाव उत्पन्न हो सकता है।
भारत संहिता में भारत जी ने कहा है:
“पशुस्य द्विजातीना वृद्धि ब्रह्म च परवर्ण।”
उनके अनुसार इस ग्रहण के स्वामी ब्रह्मा हैं। उस ग्रहण में पशुओं की वृद्धि, कृषि की उन्नति, ब्राह्मणों एवं बुद्धिजीवियों को सुख और सफलता प्राप्त होती है।
इस ग्रहण के प्रभाव में पर्वतीय या ऊँचाई वाले क्षेत्रों के लोग, ओडिशा, बंगाल, बिहार आदि राज्यों में जातीय या साम्प्रदायिक तनाव की घटनाएँ हो सकती हैं। कुम्भ राशि में ग्रहण हो तो भूकम्प और दैविक आपदाओं आदि आने की प्रबल संभावनाएँ अधिक होती हैं।

ग्रहण दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा
ग्रहण भारत, एशिया, पश्चिमी ऑस्ट्रेलिया और यूरोप समेत दुनिया के कई हिस्सों में दिखाई देगा। विशेषज्ञों के अनुसार, एशिया और ऑस्ट्रेलिया में सबसे देर तक और सबसे अच्छा देखने को मिलेगा। वहां ग्रहण के समय चांद आसमान में ऊंचाई पर होगा। यूरोप और अफ्रीका में लोग इसे चांद निकलते समय थोड़े समय के लिए देख पाएंगे।
अनुमान है कि दुनिया की करीब 77% आबादी पूरे ग्रहण को देख सकेगी। बैंकॉक में 12:30 से 1:52 बजे, बीजिंग और हांगकांग में 1:30 से 2:52 बजे, टोक्यो में 2:30 से 3:52 बजे और सिडनी में 3:30 से 4:52 बजे तक देखा जा सकेगा।
21 सितंबर 2025 को भी होगा आंशिक सूर्यग्रहण
यह ग्रहण भारतीय पंचांग अनुसार कन्या राशि, उत्तरफाल्गुनी नक्षत्र में घटित होगा।
21 सितंबर 2025 को खण्डग्रास सूर्य ग्रहण घटित होगा, जो भारत में दिखाई नहीं देगा। यह सूर्य ग्रहण अमावस्या को भारतीय समयानुसार रात्रि 10:50 से 3:22 मिनट तक दिखाई देगा। ग्रहण केवल ऑस्ट्रेलिया, दक्षिण अंटार्कटिका, न्यूज़ीलैंड आदि देशों में ही दिखाई देगा।
कैसा रहेगा सितंबर में होने वाले ग्रहणों का प्रभाव
एशिया महाद्वीप में भूकम्प आने की प्रबल संभावनाएँ
बड़े विद्वानों, लेखकों, गायकों को प्राणहानि के योग
भारत के कुछ प्रदेशों में राजनीतिक उथल-पुथल की संभावना
कुछ प्रांतों में हिंसक एवं साम्प्रदायिक घटनाएँ बढ़ सकती हैं
दक्षिण भारत से जुड़े क्षेत्रों के लोगों को कष्ट हो सकता है
चंद्र ग्रहण क्या है, क्यों होता है: पृथ्वी और सभी दूसरे ग्रह गुरुत्वाकर्षण बल यानी ग्रेविटेशनल फोर्स की वजह से सूर्य के चारों ओर चक्कर लगाते हैं। सूर्य के चक्कर लगाने के दौरान कई बार ऐसी स्थिति बनती है जब पृथ्वी, सूर्य और चंद्रमा के बीच में आ जाती है। इस दौरान सूर्य का प्रकाश चंद्रमा तक नहीं पहुंच पाता है और पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ने से चंद्र ग्रहण होता है। चंद्र ग्रहण की घटना तभी होती है जब सूर्य, पृथ्वी और चंद्रमा एक सीध में हों, खगोलीय विज्ञान के अनुसार ये केवल पूर्णिमा के दिन ही संभव होता है। इसी वजह से चंद्र ग्रहण केवल पूर्णिमा के दिन होते हैं।
