नोएडा के स्टेडियम में आयोजित महाकौथिग मेले की तस्वीरें
नोएडा: नोएडा में आयोजित महाकौथिग मेला इस बार भी उत्तराखंड की संस्कृति, परंपराओं और लोक जीवन का खूबसूरत संगम बनकर सामने आया। मेले में प्रवेश करते ही ऐसा महसूस होता है जैसे शहर की भीड़-भाड़ के बीच अचानक पहाड़ की हवा चलने लगी हो और अपनेपन की खुशबू चारों ओर फैल गई हो। यह मेला सिर्फ एक आयोजन नहीं, बल्कि प्रवासी उत्तराखंडियों के लिए अपनी जड़ों से जुड़ने का उत्सव बन चुका है।

25 दिसंबर को महाकौथिग मेले के आखिरी दिन भी लोगों का जोश कम नहीं हुआ। लोग जमकर खरीदारी करते दिखे और पहाड़ी व्यंजनों के जायके का मजा लिया।

पारंपरिक पहनावा, हस्तशिल्प और जड़ी-बूटी ने खींचा ध्यान
महाकौथिग मेले में लगे स्टॉल्स पर उत्तराखंड का पारंपरिक पहनावा, ऊनी वस्त्र, हस्तशिल्प और स्थानीय आभूषण खूब पसंद किए गए। इसके साथ-साथ पहाड़ों की दुर्लभ जड़ी-बूटियाँ और आयुर्वेदिक उत्पाद भी लोगों के आकर्षण का केंद्र बने रहे। हर स्टॉल अपने साथ लोक-जीवन, परंपरा और हस्तकला की कहानी कह रहा था।

पहाड़ी व्यंजनों का स्वाद लोगों के दिलों तक पहुँचा
महाकौथिग मेले में खाने के स्टॉल्स पर पारंपरिक पहाड़ी व्यंजनों ने लोगों का दिल जीत लिया। मंडुआ की रोटी, झंगोरा की खीर, गहत-की-दाल, भट-की-चुरकानी और सिंगौरी जैसी मिठाइयों का स्वाद चखने के लिए लंबी कतारें लगी रहीं। यह स्वाद सिर्फ भोजन नहीं था , बल्कि यह पहाड़ की याद, अपनापन और सादगी का एहसास था।

देशभर की संस्कृतियों का भी हुआ संगम
महाकौथिग की खासियत यह भी रही कि यहाँ केवल उत्तराखंड ही नहीं, बल्कि देश के अन्य राज्यों की झलक भी देखने को मिली। विभिन्न राज्यों के फूड-स्टॉल, कला-प्रदर्शन और हस्तशिल्प ने मेले को एक सच्चा सांस्कृतिक मिलन-स्थल बना दिया।

क्यों खास है महाकौथिग?
• यह प्रवासी उत्तराखंडियों को अपनी जड़ों से जोड़ता है।
• नई पीढ़ी को संस्कृति, लोकगीत और परंपराओं से परिचित कराता है।
• स्थानीय कलाकारों, कारीगरों और किसानों को मंच देता है।
• एक ही जगह पर संस्कृति और उत्सव का अद्भुत अनुभव कराता है।
महाकौथिग मेला यही संदेश देता है कि जहाँ भी उत्तराखंड जाता है, वह अपने साथ संस्कार, संस्कृति और अपनापन भी लेकर जाता है।
