उत्तरकाशी के धराली में प्रकृति का प्रकोप देखने को मिला। बादल फटने की घटना के बाद बहकर आया सैलाब सब कुछ बहाकर ले गया। धराली में बने होटल और दुकानें मलबे में दब गए। खीरगंगा का पानी और मलबा सब कुछ बहा ले गाया। बादल फटने के बाद सामने आई तस्वीरें झकझोर कर रखने वाली हैं।
इस घटना पर मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने दुख जताया है। सीएम धामी ने कहा कि दुख की इस घड़ी में प्रदेश सरकार आपदा पीड़ितों के साथ खड़ी हुई है और राज्य सरकार राहत कामों को तत्परता से कर रही है।
उधर धराली की घटना पर पीएम नरेंद्र मोदी ने भी दुख जताया है। प्रधानमंत्री ने एक्स पर लिखा कि उत्तरकाशी के धराली में हुई इस त्रासदी से प्रभावित लोगों के प्रति मैं अपनी संवेदना व्यक्त करता हूं। इसके साथ ही सभी पीड़ितों की कुशलता की कामना करता हूं। मुख्यमंत्री पुष्कर धामी से बात कर मैंने हालात की जानकारी ली है। राज्य सरकार की निगरानी में राहत और बचाव की टीमें हरसंभव प्रयास में जुटी हैं। लोगों तक मदद पहुंचाने में कोई कोर-कसर नहीं छोड़ी जा रही है।
उधर गृह मंत्री अमित शाह ने भी धराली की घटना पर दुख जताया है। अमित शाह ने एक्स पर लिखा कि उत्तराखंड के धराली में फ्लैश फ्लड की घटना को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री से बात कर घटना की जानकारी ली। ITBP की निकटतम 3 टीमों को वहाँ भेज दिया गया है, साथ ही NDRF की 4 टीमें भी घटनास्थल के लिए रवाना कर दी गई हैं, जो शीघ्र पहुँच कर बचाव कार्य में लगेंगी।
धराली बादल फटने की घटना के बाद कितना नुकसान
हादसे में अभी तक चार लोगों की मौत की पुष्टि हुई है। जबकि कई लोगों के दबे होने की खबर है। उत्तराखंड के उत्तरकाशी जिले के धराली गांव की खीरगंगा में मंगलवार को अचानक बादल फटने से खीरगंगा में आई बाढ़ ने भयंकर तबाही मचा दी। गांव की ओर बढ़ते सैलाब और मलबे से कई लोग दब गए। पूरे इलाके में चीख-पुकार मच गई, धराली बाजार पूरी तरह तबाह हो गया।
बताया जा रहा है कि धराली में करीब 30 से ज्यादा होटल थे, जिनका अब नामो निशान मिट गया है। जानकारों की माने तो एक होटल में करीब 4 से 5 लोगों का स्टाफ मौजूद रहा होगा। ऐसे में मृतकों का आंकड़ा बहुत ज्यादा बढ़ सकता है।
उधर उत्तरकाशी जनपद के हर्षिल-धराली में आई आपदा के दृष्टिगत जिला प्रशासन ने हेल्पलाइन नंबर जारी कर दिये हैं। इन नंबरों पर कॉल कर राहत बचाव कामों के बारे में जानकारी ली जा सकती है।

बादल फटने की घटना क्या होती है।
बादल फटने (Cloudburst) की घटना एक अत्यंत तीव्र और सीमित क्षेत्र में होने वाली भारी वर्षा की घटना होती है, जिसमें बहुत ही कम समय में अत्यधिक मात्रा में बारिश होती है। यह घटना आमतौर पर पहाड़ी या ऊँचे इलाकों में होती है। इस दौरान पानी के तेज बहाव के साथ पानी और मलबा नीचे की तरफ बढ़ता है। उसकी ताकत इतनी ज्यादा होती कि राह में जो कुछ भी होता है वो तबाह होता चला जाता है। जैसा की हम धराली की तस्वीरों में देख रहे हैं। बहुमंजिला होटल कुछ ही सेकंड्स में धराशायी हो गए। इसी से आप फ्लैश फ्लड की ताकत का अंदाजा लगा सकते हैं।
बादल फटने की वैज्ञानिक परिभाषा:
जब किसी सीमित इलाके (20-30 किलोमीटर के दायरे में) में 1 घंटे में 100 मिलीमीटर या उससे अधिक वर्षा होती है, तो इसे “बादल फटना” कहा जाता है।
बादल फटने की प्रक्रिया कैसे होती है?
वाष्पीकरण (Evaporation): समुद्र, नदियों या झीलों से पानी वाष्प बनकर ऊपर उठता है।
संघनन (Condensation): ये वाष्प ठंडी हवा में जाकर घनीभूत होकर बादल बनाती।
भारी नमी वाले बादल: कभी-कभी नमी बहुत ज़्यादा हो जाती है और हवा की गति कम होने के कारण यह बादल एक ही स्थान पर रुक जाते हैं।
एक साथ भारी बारिश: जब बादल एक सीमित क्षेत्र पर जमकर टूटते हैं, तो बहुत कम समय में भारी बारिश होती है… यही बादल फटना है।
बादल फटने की घटनाएं कहाँ होती हैं?
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर जैसे पर्वतीय क्षेत्रों में सबसे ज़्यादा
