हरिद्वार: सावन महीना शुरू होते ही शिवभक्ति का उत्सव हरिद्वार में अपने चरम पर है। कांवड़ यात्रा ने शहर को भक्ति के नारंगी रंग में डुबो दिया है। लाखों कांवड़िए गंगा जल लेने पहुंचे हैं और हरिद्वार की सड़कों से लेकर घाटों तक एक अलौकिक दृश्य उभर कर सामने आ रहा है।
नारंगी वस्त्रों में लिपटे, कंधों पर कांवड़ उठाए, जय भोलेनाथ के नारों से गूंजता हरिद्वार… ये नज़ारा किसी धार्मिक मेले से कम नहीं। श्रावण मास की पवित्रता के साथ शुरू हुई कांवड़ यात्रा ने हरिद्वार को फिर से एक बार आस्था के महासंगम में बदल दिया है।
हर साल की तरह इस बार भी लाखों की संख्या में श्रद्धालु उत्तर भारत के विभिन्न राज्यों से हरिद्वार पहुंचे हैं। दिल्ली, यूपी, राजस्थान, पंजाब, बिहार और यहां तक कि महाराष्ट्र से भी कांवड़िए आस्था के इस पर्व में शामिल हो रहे हैं।
उत्तराखंड आ रहे कांवड़ियों का मुख्यमंत्री धामी ने स्वागत किया है। मुख्यमंत्री ने कहा कि देवभूमि पधार रहे समस्त शिवभक्तों को कांवड़ यात्रा–2025 की हार्दिक शुभकामनाएं! देवाधिदेव महादेव की कृपा से यह पवित्र यात्रा आप सभी के जीवन में सुख, शांति और मंगल का संचार करे, यही कामना है। प्रदेश सरकार आस्था और आराधना के इस महापर्व को सुरक्षित, सुव्यवस्थित और आनंदमयी बनाने के लिए पूरी तरह समर्पित है। यात्रा के दौरान माँ गंगा की निर्मलता और समाज में अनुशासन की भावना बनाए रखने में प्रशासन का सहयोग करें। हर हर महादेव !
कांवड़ मेले में हर की पैड़ी के घाटों के आस पास गोताखोरों की तैनाती है। गंगा के तेज बहाव में बहे एक कांवड़िये को राहत बचाव टीम ने रेस्क्यू किया
उधर कांवड़ यात्रा को लेकर पुलिस और प्रशासन भी अलर्ट मोड पर है। इसी को लेकर उत्तराखंड पुलिस और अर्धसैनिक बलों ने हरिद्वार में फ्लैग मार्च किया।
ऋषिकेश की पहाड़ियों पर स्थित नीलकंठ महादेव मंदिर में कांवड़ियों की भीड़ उमड़ रही है।
धर्मनगरी हरिद्वार में भी आस्था के अलग-अलग रंग दिखाई दे रहे हैं।
